The Latest

Showing posts with label love sayari. Show all posts
Showing posts with label love sayari. Show all posts
The wife’s mother rushed into the maternity wing to find out
how her daughter was progressing. As she entered the
waiting room, she spotted her son-in-law. Unbeknown to her,
he was listening to the cricket on his IPod.
“How’s it going?” she asked anxiously.
“Not bad,” he smiled, “they’ve got four out and there’s only
one to go.”
“Aaah,” she screamed, and fainted.

. . . . . एक प्यारी सी कविता . . . . .

              " वक़्त  नहीं "

हर  ख़ुशी  है  लोंगों  के दामन  में,
पर  एक  हंसी  के  लिये वक़्त  नहीं.

दिन रात  दौड़ती  दुनिया  में,
ज़िन्दगी  के  लिये ही  वक़्त नहीं.

सारे  रिश्तों को  तो  हम मार चुके,
अब  उन्हें  दफ़नाने  का  भी वक़्त नहीं ..

सारे  नाम  मोबाइल  में  हैं ,
पर  दोस्ती  के  लिये  वक़्त  नहीं .

गैरों  की  क्या  बात करें ,
जब  अपनों  के  लिये  ही वक़्त नहीं.

आखों  में  है  नींद भरी ,
पर  सोने  का वक़्त  नहीं .

दिल  है  ग़मो  से  भरा  हुआ ,
पर  रोने का  भी  वक़्त  नहीं .

पैसों  की दौड़  में  ऐसे  दौड़े, की
थकने  का  भी वक़्त  नहीं .

पराये एहसानों  की क्या  कद्र  करें ,
जब अपने  सपनों  के  लिये  ही वक़्त नहीं 

तू  ही  बता  ऐ  ज़िन्दगी ,
इस  ज़िन्दगी  का  क्या होगा,
की हर  पल  मरने  वालों  को ,
जीने  के  लिये भी  वक़्त  नहीं ....